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माँ की गोद मिली है यारो , मुझको अब सो जाने दो

Posted On: 30 Sep, 2012 में

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माँ की गोद  मिली है यारो ,

मुझको  अब  सो जाने  दो

माँ ने  सींचा था जिस तन को

अपने तन के अमृत से

उस तन को इस माँ के

चरणों में अर्पण हो जाने दो

माँ की गोद  मिली है यारो ,

मुझको  अब  सो जाने  दो

जन्म , दूध और आशिशो का

मै कर्जदार सौ जन्मो तक

जितना संभव था बस उतना

मुझको कर्ज चुकाने दो

पोंछ सको तो पोंछ देना कुछ

आंसू  भारत माँ की तक़दीर के

कुछ पंजाब ,हिमाचल आसाम के

कुछ मुंबई   दिल्ली  कश्मीर के

तुम अधिकारों की लड़ो लड़ाई

मुझको बस फर्ज निभाने दो

माँ की गोद  मिली है यारो ,

मुझको  अब  सो जाने  दो

भूल जाओ अब चश्मा चरखा

दिन बीत गए हैं  बातों के

बिगड़े तीनो बन्दर अब न

मानेगे बिन लातों के

समय हो चुका अब बाजी

सर धड की लग जाने दो

माँ की गोद  मिली है यारो ,

मुझको  अब  सो जाने  दो

भारत माँ की गोद मिली है

मुझको  अब  सो जाने  दोarmy3

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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chaatak के द्वारा
October 3, 2012

तुम अधिकारों की लड़ो लड़ाई मुझको बस फर्ज निभाने दो माँ की गोद मिली है यारो , मुझको अब सो जाने दो इससे बेहतर क्या कहा जा सकता है एक सैनिक की भावनाएं प्रकट करने पर हार्दिक बधाई!

shashibhushan1959 के द्वारा
September 30, 2012

आदरणीय जीत जी, सादर ! नस-नस में उत्साह भारती इस जोशीली रचना के लिए हार्दिक बधाई ! “समय हो चुका अब बाजी सर धड की लग जाने दो माँ की गोद मिली है यारो , मुझको अब सो जाने दो” बस, अब सचमुच सर धड की ही बाजी लगी है ! या इस पार या उस पार ! सादर !


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