फुर्सत के दिन/fursat ke din

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हादसा होते होते बचा

Posted On: 11 Feb, 2012 में

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कल रात की बात है करीब 8 :30 पर मै परिवार समेत अपनी कार से कही से वापस आ रहा था तो कसबे के मेन  चौराहे से मात्र 300m की दूरी पर एक प्रत्याशी व्  कुछ समर्थक एक लग्जरी गाड़ी सड़क के बीचो बीचलिए खड़े थे जिसकी हेड लाईट फुल बीम पर जल रही थी और ड्राइवर साइड में गाडी के बाहर भी 5 – 6 लोग खड़े थे जोकि तेज लाईट के कारण नहीं दिख रहे थे मैंने सतर्कता से अंदाजा लगाते हुए जब क्रासिग करनी चाही तो बमुश्किल उन खड़े लोगो को बचा पाया ,जब गिला किया गया तो आखे दिखने की भी कोशिश की गई पर चुनाव का माहौल होने व् कुछ लोगो के परिचित होने (ग्रामप्रधान पुत्र ) पर “नेताजी” को परिचय मिलने पर आखे दिखने का क्रम “बड़े भाई आशीर्वाद दीजिये गा व् “बहन जी” का ख्याल रखिये गा पर   समाप्त हुआ

” तो भाइयो मुझे बहन जी का तो ख़ास ख्याल रखना ही चाहिए न “

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

अलीन के द्वारा
February 16, 2012

सादर नमस्कार! हादसा और राजनीती भाई वह! … कृपया मेरी सच्ची प्रेम कहानी पर अपना बेशकीमती सुझाव और प्रतिक्रिया अवश्य दे… मेरी सदा-एक अधूरी परन्तु सच्ची प्रेम कहानी

dineshaastik के द्वारा
February 13, 2012

भाई जी, चुनाव का मौसम था जो इस तरह से बात हो गई। अन्यथा इन बहन जी का ख्याल रखवाने वाला तरीका कुछ ऐसा होता है कि एक्सीडेंट का सबूत भी नहीं मिलता। बस वाहे गुरू की कृपा थी कि चुनाव का मौसम था।    बहिन जी ने तो राजकोश का खूब ख्याल रखा, देखते हैं मतदाता कैसा ख्याल रखता है बहिन जी का ख्याल रखवाने वालों का। http://dineshaastik.jagranjunction.com/बहस

abhishektripathi के द्वारा
February 12, 2012

सादर प्रणाम! मैं मतदाता अधिकार के लिए एक अभियान चला रहा हूँ! कृपया मेरा ब्लॉग abhishektripathi.jagranjunction.com ”अयोग्य प्रत्याशियों के खिलाफ मेंरा शपथ पत्र के माध्यम से मत!” पढ़कर मुझे समर्थन दें! मुझे आपके मूल्यवान समर्थन की जरुरत है!

shashibhushan1959 के द्वारा
February 11, 2012

आदरणीय जीत जी, सादर ! अगर मुझे भ्रम नहीं हो रहा है तो श्हयद आप उसी कथित “बहनजी” की बात कर रहें हैं न, जो राजधानी लखनऊ में विराजमान हैं, जो दलितों की मसीहा कही जाती हैं, जो प्रदेश की दौलत को लूटकर अपनी तिजोरी भर रहीं हैं, जो प्रायः अबे-तबे की अभद्र भाषा का प्रयोग किये बिना बात नहीं करतीं, जो ताडका और सूपनखा की बहन हैं,…………. तो उनके राज्य में जो न हो जाय सो कम है. इश्वर का धन्यवाद की आप सब सकुशल हैं !

    malkeet singh jeet के द्वारा
    February 12, 2012

    आपने खूब पहचाना श्रीमान ,एक “बहनजी ” काफी है ब……………………………………….!

abodhbaalak के द्वारा
February 11, 2012

इश्वर का धन्यवाद की आप सब सकुशल हैं बाकी सब तो चलता ही रहता है, वैसे बहन जी का ……… :) http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

आर.एन. शाही के द्वारा
February 11, 2012

बिल्कुल रखना चाहिये ‘जीत’ प्रा जी । बहन जी के लिये यही मौसम असली सावन और राखी का त्योहार है, और आप तो सभी के प्रा हैं ही । बाद में कहीं आपको उधर से ताने वाले गाने न सुनने पड़ जायँ, जैसे कि – ‘शायद वो सावन भी आए …जो पहला सा रंग न लाए … यादों के दीपक जलाना … जलाना … भैया मेरे …’

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    February 11, 2012

    आदरनीय ,समर्थन जताने का धन्यवाद ,वैसे “बहन जी “का ख़ास ख्याल तो पूरी उ प की जनता को रखना चाहिए बहन जी ना होती तो क्या इतने बड़े बड़े दुर्लभ जीव ( हांथी) पार्को में देखने को मिलते ?इस पुनीत कार्य का पैसा कही न कही खामखा विकास में लग जटा जो की बिलकुल भी प्रदेश हित में नहीं होता !!!!


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