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नहीं चाहिए मुझे बेटियां ?

Posted On: 26 Nov, 2011 Others में

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मुझे नहीं चाहिए बेटियां ?
क्या जरुरत है ,मुझे बेटी की ,
मिल गयी माँ यही काफी है
मिल गयी   पत्नी यही काफी है ,
इसी तरह मिल जाएँगीं,
मेरे बेटों को भी बहुए ,तभी तो
नहीं चाहिए मुझे बेटियां
हे  प्रभु  सभी को देना एक एक बेटी
पर मुझे नहीं  ,”तांकि”
तांकि  कह सकूँ लोगों से
बेटी बचाओ -बेटी बचाओ
लगा सकू यही रट हर जगह
भाषण में, टीवी पर, अख़बार में पर
नहीं चाहिए मुझे बेटियां
नहीं बन सकता मै
देखा दुनी का अमिताभ
(क्या आप मेरी इस सोच को बदल सकते हैं  उपाय जरुर बताये )
*मित्रो क्षमा करे मन की बात रखने को रचना को शीर्षक नकारात्मक देना पड़ा =क्योंक़ि कुछ  दहेज़  से  डरे लोग यही सोचते भी है तो कुछ बेटियों को बोझ समझ पैदा करने वाले भी सोचते है यह बोझ जितनी जल्दी उतारे अच्छा ,”वसे मेरी एक राय है क़ि बेटी का रिश्ता करना है है तो लड़का क्या करता है ,उसका   ख़ानदान कैसा है  क्या आदते है उसकी ये तो देखें ही पर इन सबसे जरुरी एक बात और देखें क़ि ससुराल में बेटी क़ि कोई ननद भी है क़ि नहीं कसम खा लीजिए जहाँ ननद नही है वहां बेटी का रिश्ता नहीं करेगे बस फिर सभी एक सुर में कहेंगे मुझे बेटी चाहिए क्योकि मुझे बहु  भी चाहिए ——मलकीत सिंह” जीत “
बंडा शाहजहाँ पुर
9918826316

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8 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

dineshaastik के द्वारा
January 12, 2012

ऐसी भावावेश वाली रचना को नमन…….

Amita Srivastava के द्वारा
November 27, 2011

आदरणीय जीत जी बहुत सही कहा ,जहाँ ननद नही वहां बेटी की शादी नही करेगे | अच्छी रचना ..

Santosh Kumar के द्वारा
November 26, 2011

जीत जी ,.सत श्री अकाल अत्यंत सुन्दर सन्देश देती रचना के लिए नमन आपको ,.साभार

shashibhushan1959 के द्वारा
November 26, 2011

आदरणीय जीत जी, सादर. . आसमान से बारिश की जो बूँदें गिरती, सबको एक सामान ताजगी से भरती है. बेटा-बेटी में समाज ने अंतर डाला, माँ की कोख कहाँ इनमें अंतर करती है. . रूढ़ विचारों ने जो खोद रखी है खाई, नई चिकित्सा सुविधा ने कुछ और बढ़ाया. भूल गए, इन दोनों को इश्वर ने भेजा, बेटा-बेटी एक दुसरे की ही छाया. . मान्यवर, आपने अंत में अपनी टिपण्णी में जो विचार रखे हैं, अगर हम उसपर थोड़ा भी ध्यान दें, तो तस्वीर बदलनी शुरू हो जायेगी. बहुत धन्यवाद.

minujha के द्वारा
November 26, 2011

अच्छा संदेश देती रचना मलकीत जी जहाँ ननद नही है वहां बेटी का रिश्ता नहीं करेगे बस फिर सभी एक सुर में कहेंगे मुझे बेटी चाहिए क्योकि मुझे बहु भी चाहिए बहुत अच्छा

nishamittal के द्वारा
November 26, 2011

व्यंग्यात्मक कटु सत्य को व्यक्त करती रचना बेटियां बचाओं को सार्थक करती हुई.बधाई

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
November 26, 2011

प्रिय मलकीत भाई बहुत अच्छी रचना व्यंग्य से सब को आइना दिखाती हुयी …..दहेज़ लोभी काश कुछ आँखें खोलें ..भ्रमर ५

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    November 26, 2011

    धन्यवान भ्रमर जी ,मगर क्या करें लोग अंधे हो चुके है आइना दिखये तो किस किस को


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