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अमिताभ बच्चन जी दादा बन गए -बेटियां (जागरण जंक्शन फोरम)

Posted On: 17 Nov, 2011 में

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बहुत  अच्छा लगा जब पता लगा की सदी के महा नायक अमिताभ बच्चन जी दादा बन गए लेकिन उससे भी अच्छी बात ये थी कि उनकी बहू ने एक प्यारी सी परी सी बेटी को जन्म दिया क्योंकि जिस तरह हमारे समाज में कन्या भ्रूण   हत्या की कुरीति एक अमर बेल की तरह बढ़ रही है और लिंग अनुपात बिगड़ता जा रहा है  ये एक शुभ संकेत है यह एक ऐसा परिवार  है जिसे आदर्श परिवार की तरह देखा जा सकता हैऔर जिसका देश के लोग अनुसरण करते है यां करने की कोशिश  करते हैं   बेटियां यूँ तो रोज़ कंही न कहीं किसी न किसी घर में पैदा होती ही है भले ही बेटों की अपेक्षा कम ही सहीं पर होती तो है  मगर बहुत कम घर ऐसे हैं जहाँ बेटी के जन्म के बाद माहौल खुश नुमा रहता है नहीं तो ज्यादातर घरों में बेटी को बिन बुलाये महमान की तरह ही देखा जाता है बहुत से “साधन संपन घरों में तो चिकित्सकीय सुविधाओ का उपयोग (दुर उपयोग ) कर के इन्हें आने ही नहीं दिया जाता ऐसे में कहा  जा सकता है की भारत वर्ष केसबसे साधन संपन्न परिवार में बेटी का जन्म लेना रुढ़िवादी लोगों के लिए एक नजीर है और सन्देश भी की बेटियां बोझ हैं तो सिर्फ उन लोगों के लिए जो उन्हें बोझ समझ कर ही जन्म देते है और सारीउम्र  अपनी इसी मानसिकता  में अपनी रुढ़िवादी सोच का बोझ उनके ऊपर लाद देते ,जबकि बेटियां  को ख़ुशी का रूप हैं चांहे माँ के रूप में ,बहू ,पत्नी या बहन के रूप में बोझ है तो सिर्फ लोगों की अपनी सोच जो दिन ब दिन  गिरती जा रही है

उम्मीद है  अपने महानायक आदर्श ,द्वारा दिए गए इस शुभ सन्देश को हम सब समझेगे व् उनकी ख़ुशी में शामिल भी होंगे और अपने घर में भी ऐसी “खुशिया” आने दे गे उन्हें रोकेगे नहीं   ,सोचिये क्या इस महा नायक के पास इन्हें रोकने के साधन नहीं थे ?

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

sandhya yadav के द्वारा
November 19, 2011

जीत भैया , बढ़िया सन्देश देती पोस्ट ,व्यस्तता में देख नहीं पाई थी आज सुबह अख़बार में आपका नाम देखा तो सोचा मै भी हजारी लगा दूँ ,

akraktale के द्वारा
November 18, 2011

चलो जब जागे तभी सवेरा.यदि महानायक की पोती के कारण लोगों की मति बदलती है तो यही सही. किसी भी तरह हो स्त्री पुरुष का यह बिगड़ता संतुलन तो सुधरेगा.

alkargupta1 के द्वारा
November 18, 2011

विचारणीय अर्थ पूर्ण आलेख !

rita singh 'sarjana' के द्वारा
November 17, 2011

मलकीत जी , सही कहा आपने ,अच्छी पोस्ट ,बधाई

minujha के द्वारा
November 17, 2011

मलकीत जी अच्छा संदेश देती एक अच्छी रचना

abodhbaalak के द्वारा
November 17, 2011

सार्थक लेख, आपने अमिताभ जी से जोड़ कर एक गहरी बात ………… http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
November 17, 2011

प्रिय मलकीत जी बहुत सुन्दर और सार्थक लेख आप का …सच को बयान करता. सदी के महानायक अमित जी .. आइये ऐसे परिवार का जी भर स्वागत करें …बेटी और माँ के साथ पिता और दादा दादी सब को ढेर सारा स्नेह व् शुभ कामनाएं … भ्रमर ५ जबकि बेटियां को ख़ुशी का रूप हैं चांहे माँ के रूप में ,बहू ,पत्नी या बहन के रूप में बोझ है तो सिर्फ लोगों की अपनी सोच जो दिन ब दिन गिरती जा रही है उम्मीद है अपने महानायक आदर्श ,द्वारा दिए गए इस शुभ सन्देश को हम सब समझेगे व् उनकी ख़ुशी में शामिल भी होंगे और अपने घर में भी ऐसी “खुशिया” आने दे गे उन्हें रोकेगे नहीं


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