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भारतीय रेल "तत्काल सेवा "

Posted On: 12 Nov, 2011 में

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railभारतीय रेल “तत्काल सेवा ”

आदरणीय ,क्या अप समझते है कि इस तरह से दलालों पर रोक लगेगी ?
बल्कि उनके मुनाफे में और इजाफा होगा ,कैसे
श्री मान,चाहे तत्काल हो या साधारण जो भी घोटाला हो रहा है सब स्टेशन से निकले टिकेट पर ही होता है न कि इंटरनेट एजेंट के टिकेट पर बल्कि 8 से 10 बजे तक एजेंटो पर रोक से ग्रामीण क्षेत्र के यात्रियों को असुविधा ही होगी क्यों कि ग्रामीण क्षेत्र में न तो हर आदमी कम्पूटर व् इंटरनेट लिए बैठा है और  जो लोग स्टेशन से 40  -50  km दूर है वह सुबह चलकर स्टेशन पर लाइन में भी लग  सकता   नहीं और 10 बजे तक उसके लिया तत्काल में स्टेशन पर सक्रिय दलाल कुछ छोड़ते नहीं ,और स्टेशन पर कुछ कर लो मिली भगत के चलते आप दलालों पर लगम नहीं लगा सकते बल्कि यदि यह सुविधा स्टेशन के साथ ही इंटरनेट एजेंट को भी मिले तो घोटालों को कम किया जा सकता है क्यों कि कोई भी एजेंट अपना पैसा फसा कर बिना मांग (ग्राहक द्वारा ) टिकेट कर के नहीं रख सकता क्यों कि एजेंट की टिकेट पर  i  d  हर हाल में  आवश्यक है जबकि स्टेशन के दलाल तो टी टी तक को गांठ कर रखते है और पचास रु में आइ दी का झंझट ख़तम जो की ग्राहक की ही जेब से जाये गा
तो अब घोटाले बढ़ेंगे या कम होंगे बस यूँ समझ लें के स्टेशन का तत्काल  पहले सौ रु एक्स्ट्रा पर मिलता था अब दो सौ खर्च करने को तैयार रहिये ,
(मै करने तो जा रहा था किसी लेख पे प्रतिक्रिया पर बड़ी हो गई तो सोचा पोस्ट ही कर दूँ )
जय हिद जय भारत :”मेरा भारत महान”

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4 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
November 16, 2011

मलकीत भाई बात तो आप की जायज है लेकिन जाएँ तो जाएँ कहाँ एक तरफ गहरी खाईं एक तरफ बड़ा सा पहाड़ जो हिलता नहीं …कुछ अच्छा चलिए शहरी के लिए ही सही पर बाकी तो अभी भी बुरा है ही …टी टी और स्टेशन वालों के तो बल्ले बल्ले हैं ही भ्रमर ५

akraktale के द्वारा
November 13, 2011

जीत जी, आपकी बात सही है जब तक विकेंद्रीकरण नहीं होगा समस्या बनी रहेगी. मैंने एक पोस्ट पर और लिखा है कि सर्वाधिक एजेंट होटल वालों के ही होते हैं यदि इनके लिए भी एक कोटा निर्धारित कर दिया जाए तो शायद समस्या कुछ कम हो सकती है.

Lahar के द्वारा
November 12, 2011

मलकीत जी सप्रेम नमस्कार रेल मंत्री की इस योजना से सिर्फ और सिर्फ आम आदमी की तकलीफे बढेंगी |

manoranjan thakur के द्वारा
November 12, 2011

बर्तमान सरोकार से बाबस्त


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