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जिम्मेदारी- हमारे शास्त्री जी "१००वी जयंती"

Posted On: 4 Oct, 2011 में

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छः साल का एक लड़का अपने दोस्तों के साथ एक बगीचे में फूल तोड़ने के लिए घुस गया। उसके दोस्तों ने बहुत सारे फूल तोड़कर अपनी झोलियाँ भर लीं। वह लड़का सबसे छोटा और कमज़ोर होने के कारण सबसे पिछड़ गया। उसने पहला फूल तोड़ा ही था कि बगीचे का माली आ पहुँचा। दूसरे लड़के भागने में सफल हो गए लेकिन छोटा लड़का माली के हत्थे चढ़ गया।
बहुत सारे फूलों के टूट जाने और दूसरे लड़कों के भाग जाने के कारण माली बहुत गुस्से में था। उसने अपना सारा क्रोध उस छः साल के बालक पर निकाला और उसे पीट दिया।

नन्हे बच्चे ने माली से कहा – “आप मुझे इसलिए पीट रहे हैं क्योकि मेरे पिता नहीं हैं!”

यह सुनकर माली का क्रोध जाता रहा। वह बोला – “बेटे, पिता के न होने पर तो तुम्हारी जिम्मेदारी और अधिक हो जाती है।”

माली की मार खाने पर तो उस बच्चे ने एक आंसू भी नहीं बहाया था लेकिन यह सुनकर बच्चा बिलखकर रो पड़ा। यह बात उसके दिल में घर कर गई और उसने इसे जीवन भर नहीं भुलाया।

उसी दिन से बच्चे ने अपने ह्रदय में यह निश्चय कर लिया कि वह कभी भी ऐसा कोई काम नहीं करेगा जिससे किसी का कोई नुकसान हो।

बड़ा होने पर वही बालक भारत के स्वतंत्रता प्राप्ति के आन्दोलन में कूद पड़ा। एक दिन उसने लालबहादुर शास्त्री के नाम से देश के प्रधानमंत्री पद को सुशोभित किया।

साभार:-हिंदी जोन

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

crittYerork के द्वारा
October 24, 2011

हाँ, वास्तव में .

Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
October 5, 2011

आदरणीय मलकीत सिंह जी, सादर अभिवादन ! भारत रत्न श्री लालबहादुर शास्त्री जी जन्म दिवस के अवसर पर आपकी यह प्रस्तुति अच्छी लगी | यह एक बिडम्बना है कि हम देश के इन वीर सपूतों को विसार देते हैं, इससे बड़ी कोई कृतघ्नता नहीं ………. मैंने भी इस बात को २ अक्तूबर को अपने ब्लॉग में उठाया है | http://abhyudaya.jagranjunction.com/2011/10/03/%E0%A4%87%E0%A4%B8-%E0%A4%AE%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B6%E0%A4%A4-%E0%A4%B6%E0%A4%A4-%E0%A4%A8%E0%A4%AE%E0%A4%A8/

abodhbaalak के द्वारा
October 4, 2011

मलकीत जी प्रेरक प्रसंग के लिए आपका आभारी हूँ, काश हम शास्त्री जी से जुड़े और भी ….. http://abodhbaalak.jagranjunction.com/


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