फुर्सत के दिन/fursat ke din

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हे राम !!!

Posted On: 2 Oct, 2011 Others,लोकल टिकेट में

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हे राम !
हम कितने सच्चे अनुआयी है गाँधी के
आज तक कहते आ रहे है बार बार उनके कहे अंतिम शब्द
हे राम !
जब भी कोई छलता विश्वास को ,मानवीयता को
यां मेरे देश को सब देखते है मूक दर्शक से और कह देते है
हे राम !
कोई नेता मारता देश के गाल पर तमाचा घोटाले का
या पोत देता है घ्रणा और नफरत की कालिख और हम कह देते है
हे राम !
चलते है पूरी ईमानदारी से युगपुरुष के अहिंसा के मार्ग पर
सौप देते है देश का दूसरा गाल काले अंग्रेजो को और कह देते है
हे राम ! ……….. हे राम ! ……….. हे राम !

मलकीत सिंह जीत
बंडा शाहजहांपुर उ प्र
9935423754

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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Dr.KAILASH DWIVEDI के द्वारा
October 3, 2011

मलकीत सिंह जी , सादर नमस्कार ! आपने सही कहा है | आप बंडा शाहजहांपुर उ प्र के हैं देखकर प्रसन्नता हुयीं | मैं भी शाहजहांपुर उ प्र के पास जंगबहादुरगंज कस्बे का रहने वाला हूँ | वर्तमान में मैं वृन्दावन -मथुरा में एक प्राकृतिक चिकित्सालय में चिकित्साधिकारी के रूप में कार्यरत हूँ |

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    October 4, 2011

    धन्यवाद डा .साहब ,सच मुच अपना दायरा जितना बड़ा कर लें उतने ही शुभचिंतक मिलते जाते है ,जब घर से निकलो तेरा घर मेरा घर ,गावं से बहार आजाओ तो तेरा गावं मेरा गावं यूँ ही शहर से बहार जा कर पूरा शहर अपना सा लगने लगता है और शहर की हर शै से लगाव सा हो जाता है और होना भी चाहिए

Alka Gupta के द्वारा
October 3, 2011

मलकीत सिंह जी , अति सुन्दर भावाभिव्यक्ति !

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    October 3, 2011

    आदरनीय ,उत्साह वर्धन हेतु धन्यवाद

sadhana thakur के द्वारा
October 3, 2011

सर बहुत ही अच्छी रचना ,बधाई हो ,,,,

    malkeet singh jeet के द्वारा
    October 3, 2011

    साधना जी उत्साह वर्धक प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद

Santosh Kumar के द्वारा
October 3, 2011

आदरणीय सिंह साहब ,.सत श्री अकाल सच्ची काली श्रद्धांजलि ,..बढ़ती राक्षसी प्रवित्तिओं के बीच केवल हे राम कहना ही …..साधुवाद http://santo1979.jagranjunction.com/

    malkeet singh jeet के द्वारा
    October 3, 2011

    संतोष जी सकरात्मक व् उत्साह वर्धक प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद

Abdul Rashid के द्वारा
October 2, 2011

बेहतरीन बहुत खूब http://singrauli.jagranjunction.com

    malkeet singh jeet के द्वारा
    October 3, 2011

    समय निकल कर रचना पढने व् प्रतिक्रिया देने का धन्यवाद

vikasmehta के द्वारा
October 2, 2011

बढ़िया कविता हर साहब सच्चाई बया करता हुआ ….. vikasmehta.jagranjunction.com क्या हिन्दू ही बर्बर होते है ?

    malkeet singh jeet के द्वारा
    October 3, 2011

    धन्यवाद विकास जी

abodhbaalak के द्वारा
October 2, 2011

मलकीत जी केवल एक शब्द के अनेख भाव, बड़ी ही सुन्दरता के साथ आपने ………… ऐसे ही लिखते रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    malkeet singh jeet के द्वारा
    October 3, 2011

    अबोध जी कीमती समय देने के लिए धन्यावद

malkeet singh "jeet" के द्वारा
October 2, 2011

आदरणीय क्षमा प्रार्थी हूकिसी तकनिकी त्रुटी के कारण यह पोस्ट एक बार डिलीट कर के दोबारा पोस्ट करनी पड़ रही है


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