फुर्सत के दिन/fursat ke din

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नेताओ ने इसे आज समाज को बाटने का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है(Jagran Junction फोरम)

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हो सकता है मेरी बात किसी को चुभ जाय,
मै भारतीय संविधान में मीन मेख नहीं निकल रहा जब इसे तैयार किया गया तब  माननीय डा बी आर    अम्बेडकर    को तब के हालत  में जाती  गत  आरक्षण  आवश्यक  लगा  होगा  लेकिन  धर्मो  के नाम पर लोगो को बाटनेवाले नेताओ ने इसे आज समाज को बटने का सबसे बड़ा हथियार बना लिया है यदि डा साहेब को जरा भी गुमान होता की मेरे द्वारा गरीबो  ( उस  समय  के दलित  )के उत्थान हेतु किये उपाय भविष्य में समाज को बाँटने का काम करेगे  तो उसी समय इस आरक्षण को जाती गत न करके आर्थिक आधार देते काश माननीय आंबेडकर  जी भी गाँधी जी (अन्ना   जी   ) की तरह  फिर  से  अवतार  लेते  और   जन  हित  में अपने  बनाये  संविधान जिसे उन्हों ने उस समय की जरुरत के हिसाब से पूरे मनोयोग व् ईमानदारी से तैआर किया  में आज की जरूरत  के हिसाब  से  कुछ  नए  अध्याय  जोड़  देते और  कुछ  पुराने  हटा  जाते  जिन्हें   की आज के वोट  चुसू  नेता  कभी  नहीं कर  पाएंगे   और  उन   नेताओ को स्वयं  बता पाते जो डाक्टर साहेब को अपनी बपौती समझते है की मै तुम  चंद नेताओ की जागीर नहीं सम्पूर्ण भारत वंशियो का श्रधेय हू |
सच मानना दोस्तों जातिगत आरक्षण भी देश को कई बार अक्षम नेत्रत्व व् लोक सेवक दे कर भ्रस्टाचार की तरह  खोखला ही कर रहा है  या फिर चंद उदित राज़ो बुखारियो ,या स्वयंभू   बहन जी  (जिन्हें चंद साल पहले तक कोई नहीं जनता था ) सत्तासुख  ही दे सकता है देश का कोई भला नहीं कर सकता हाँ आज के दलितों को जो मेहनत से सब कुछ पाने की कूबत रखते है निक्कम्मा और काम चोर जरुर बना देगा
अगर किसी को बुरा लगे तो क्षमा करे सच अक्सर कडुवा ही होता है

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

crittYerork के द्वारा
October 27, 2011

शुक्रियाधन्यवाद देने या मना करने का तरीका”]],interjectionधन्यवादशुक्रियाyou thankyou thankशुक्रियाधन्यवाद

manoranjan thakur के द्वारा
August 31, 2011

bahut hi sunder manpasand

Amar Singh के द्वारा
August 31, 2011

वोट पाने और सत्ता में रहने का लोभ ने इस देश की राजनीति से ऐसे ऐसे कार्य करवाए है जिनके बारे में यदि लिखने शुरू करे तो एक ग्रन्थ तैयार हो सकता है, जो जनता के खून से भरा दिखेगा. इस विषय में कुछ और शब्द http://singh.jagranjunction.com/2011/08/31/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%A7/

    malkeet singh jeet के द्वारा
    August 31, 2011

    वीर जी बस सादे देश विच दो कम्म हो जाण जिसदे तिनं तो ज्यादा बच्चे ओहनू वोट ,समेत सारी सरकारी सहुलता बन्द कर दो ते एक आरक्षण ख़तम कर दो देखो सब कांने वाग सिद्धे हो जानगे एहनी क शिक्षा ते सानु चाइना तो ही ली लेनी चाहीदी है

Santosh Kumar के द्वारा
August 30, 2011

सिंह साहब ,..सत श्री अकाल … बाँटो और राज करो की अंग्रेजी नीति उनके हिन्दुस्तान छोड़ने के बाद भी बदस्तूर जारी है ,…यही तो नेताओ का ब्रम्हास्त्र है,..आरक्षण का लाभ मलाईदार तबका ही उठा रहा है ,….बाकी निशाजी और राजकमल जी ने सब कह ही दिया है ,..सादर धन्यवाद http://santo1979.jagranjunction.com/

Rajkamal Sharma के द्वारा
August 30, 2011

अंग्रेजो के जमाने के बहुत से कानून अभी भी लागु है जिनको की आज के बदले हुए हालात में नए सिरे से दुबारा बनाने की जरूरत है और बाबा साहिब को तो बली का बकरा बनाया गया था अपने कूड़े कबाड़ रूपी विचारों को संकलित करके उनपर बाबा साहिब का नाम चस्पा कर दिया गया …. पता नहीं किस -२ देश के सविंधान से यह सभी गले सड़े विचार लेकर हम पर थोप दिए गए …. धन्यवाद

    Amar Singh के द्वारा
    August 31, 2011

    उस समय भी राजनीति और सत्ता पर बैठे खिलाडियों ने भारत के लोगो के साथ ऐसे ऐसे छल किये जिसे आज तक लोग उसे भुगत रहे है.

nishamittal के द्वारा
August 30, 2011

आपने सही कहा जीत साहब हमारे नेता आरक्षण,भाषा,धर्म ,सम्प्रदाय के नाम पर देश को बांटे आये हैं,जिससे वह अपनी सत्ता चला सकें.बहुत दिन पश्चात मंच पर आने पर स्वागत.

bharodiya के द्वारा
August 30, 2011

बुरा लगाने का कोई सवाल नही है भाई सहब । बुरा तो उसे लगता है ना जो फोकट की खाने की चाह रखते है । ऐसे फोकटियो की परवाह क्यो । http://bharodiya.jagranjunction.com/2011/08/30/%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%9C%E0%A4%BE-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C/


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