फुर्सत के दिन/fursat ke din

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माया महां ठगिनी हम जानि.......................................????????????

Posted On: 6 Aug, 2011 Others,लोकल टिकेट में

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माया महां ठगिनी हम जानि…………………………………………………………………….???????????? एक उपलब्धि तो माया राज की है ही ,मनो या न मनो ,राजाओ महाराजो से लेकर महात्मा गाँधी और राहुल गाँधी तक जमाना आ गया देश में सभी धर्म और जातिया रहती थी और आज भी बाकि पूरे देश में रहती होगी लेकिन हमारे उ प्र में तो सिर्फ या “दलित” रह गए है या “दबंग” आपके खेत से कोई फसल चुरा रहा हो आप टोक दो तो आप दबंग ,कोई पी कर आपको गालिया दे आपने जवाब दे दिया तो आप दबंग आपने (दुकानदार ) अपने सौदे के पैसे मांग लिए तो आप दबंग और आप पर तो हरिजन एक्ट भी लग सकता है क्योकि आप दबंग है ये बाते सुनी हुई नहीं है मै भुक्तभोगी हूँ और पिछले चार सालों में ऐसी घटनाये मेरे आस पास दो दर्जन से अधिक ( पांच से छ : बार मेरे साथ मेरी दुकान पे ) बार हो चुकी है हर बार मामला थाने भी पंहुचा पर जवाब “सरदार जी इसे निपटा लो वर्ना लेने के देने पड़ जायेगे माया सरकार है ? तो सरदार जी ने निपटा लिया क्योकि दुकान भी करनी है और उ प्र में रहना भी है कभी कभी तो लगता है की उ प्र में कही दलित आतक वाद न शुरू हो जाये

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla Bhramar5 के द्वारा
August 8, 2011

मलकीत भाई काफी दिनों के बाद दर्शन हुए ये दर्द ले कर माया से बच कर आ गए यही क्या कम है कांशी राम अंत तक मुह भी नहीं दिखा पाए जनता को अब राज और दबंग का हाल आप समझ ही सकते हैं अब शर्म हया रही कहाँ कहाँ जनता दरबार हर कोई तो नक्सली नहीं बन सकता न – हर बात सी बी आई से जाँच करनी होती है आप को थाने में क्या मिलेगा ?? भ्रमर ५

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    August 9, 2011

    दोबारा मंच पर आने पर आपकी उत्साह वर्धक प्रतिक्रिया मिली धन्यवाद

संदीप कौशिक के द्वारा
August 6, 2011

मलकीत जी…कहाँ गुम थे इतने दिनों तक ?? सब ख़ैरियत तो है….भगवान की दया से ??? :)


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