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"गौ दान " कितना पुण्य कितना पाप ??

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गौ दान को यु तो हमारे धर्म ग्रंथो में बड़ा महत्व पूर्ण दर्जा है और हर उग में इसे पुण्य का pratik mana गया है यहाँ तक की आज भी शादी आदि के मौके पर इस रस्म को पूर्ण या सांकेतिक रूप में निभाया जाता है लेकिन आज के parivesh में जब हरियाली का भूभाग सिमित होता जा रहा है और हर आदमी स्वार्थी हो गया है पुन्य के लिए गौदान के नाम पर एक गौवंशीय (बछड़ा या बछिया ) को खरीद कर खुला छोड़ देना कहाँ तक जायज है|

अकसर देखा गया है की ऐसे छोड़े गए गौवंशी या तो सडको पे घूमते हुए यता यात में व्यवधान पैदा करते है ,बाजार में दुकानों पर रखे खाद्य व् अखाद्य पदार्थ को नोचते खसोटते है यहाँ तक की कूड़े के ढेर से पोलीथिन आदि खाते भी देखे जाते है ‘ और कभी कभी तो भूख से आंदोलित हो कर मनुष्यों पर आक्रमणकारी भी हो जाते है जो की मनुष्यों एवं गोवंशीय दोनों के लिए घटक सिद्ध होता है

यह हल तो शहरो का ग्रामीण क्षेत्रो में भी कामो बेश यही हालत है फर्क है तो बस इतना के यहाँ ये गोवंशीय म्हणत काश किसानो का सिरदर्द बनते है और उनकी खून पसीने की म्हणत से उगे फसलो को चटकरजाते है जिसके फलस्वरूप किसान भाई उन्हें लाठियों डाँडो से प्रतंडित भी करते है और पाप के भागी बनते है और उधर वो गौवंशीय भी हिंसक होते जाते है

अब सवाल यह उठता है की पुण्य की मंशा से इन्हें छोड़ने वाले जजमान पाप के भागी न्होगे के पुण्य के ?

हाँ यदि हम वास्तव में गौदान करना ही चाहते है तो क्यों न एक गे को पुरे मनोयोग से पाले उसके भरपेट भोजन रहने ,की उचित व्यवस्था करे पुण्य भी कमाए और अपने आसपडोस के वातावरण को भी शुद्ध रख सके ताकि गोदान सांकेतिक न हो कर पूर्ण व् फलदायी हो सके

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20 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

allrounder के द्वारा
May 6, 2011

भाई मलकीत जी गौदान के महत्त्व पर प्रकाश डालते एक अच्छे सामाजिक लेख पर बधाई !

    malkeet singh jeet के द्वारा
    May 6, 2011

    सचिन जी धन्यवाद ,व्यस्तातायो के बावजूद आपने सामय दिया

manoranjanthakur के द्वारा
May 5, 2011

गोदान सांकेतिक न हो कर पूर्ण व् फलदायी हो सके बहुत सुंदर रचना

    malkeet singh jeet के द्वारा
    May 6, 2011

    सर जी धन्यवाद आपकी प्रतिक्रिया प् कर प्रसन्नता पुई

shailandraa singh के द्वारा
May 4, 2011

singh sahib desh me reet riwazo ka makhoul udaayaa jaata hai. purane samy me gaay or bachhiyaa dan me dee jaatee thee or lene wala koi brahman ya maany paksh kaa hotaa thaa wahee iskee dekh bhal kartaa tha or iska dudh dahee khataa tha. us smay har shahar me gau shalaa hotee thee jahaan unkee parvarish hotee thee bhotikbaad ne wah sab parmparao ko tilanjali de dee or sirf dikhabaa karnaa shuru kar deyaa. jab aadmee ko jagah nahee hai shahar me to jaanvar kahaan jaayenge. chhote shahro me aaj viyaaparee apnee aamdanee ka ek hissa nikal kar gau shalaa ko detaa hai jo tax free hotaa hai par desh ne tarrkee kee hai sirf apne liye ? http://www.shailandrasingh.jagaranjunction.com

    malkeet singh jeet के द्वारा
    May 6, 2011

    जी हाँ देश ने तरक्की की है , तभी तो न किसी के साथ हंसने का समय न रोने का न बीवी बच्चो के लिए समय न बड़े बूढों के लिए तो इन बे जुबान मित्रों की कौन सुने

kmmishra के द्वारा
May 3, 2011

यदि हम वास्तव में गौदान करना ही चाहते है तो क्यों न एक गे को पुरे मनोयोग से पाले उसके भरपेट भोजन रहने ,की उचित व्यवस्था करे पुण्य भी कमाए और अपने आसपडोस के वातावरण को भी शुद्ध रख सके ताकि गोदान सांकेतिक न हो कर पूर्ण व् फलदायी हो सके. . आप सही कह रहे हैं. मलकीत जी,  लोगों को गाय पालना भी सीखना चाहिए. आभार. 

    malkeet singh jeet के द्वारा
    May 4, 2011

    मिश्र जी प्रतिक्रिया देने के लिए धन्यवाद

Rajkamal Sharma के द्वारा
May 3, 2011

priy malkit singh ji ….. नमस्कार ! यह खुले जानवर (समेत गौ माता ) दुर्घटना का भी कारण बनते है , इसका भुक्तभोगी मैं खुद भी रह चूका हूँ ….. मुझको आज ही आपसे पता चला की ऐसे गोवंश दान किये हुए होते है , यह वास्तव में ही निंदनीय है …. धन्यवाद

    malkeet singh jeet के द्वारा
    May 4, 2011

    गुरुदेव ,आज के युग में अगर पैत्रक सम्पति का लालच न हो तो माँ बाप को भी लोग बुढ़ापे में ऐसे ही दान करदे

baijnathpandey के द्वारा
May 3, 2011

श्री मलकीत जी अच्छी सन्देश देती विचारपरक रचना | धन्यवाद |

    malkeet singh jeet के द्वारा
    May 3, 2011

    पांडे जी आपसे मिले स्नेह के लिए , प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

abodhbaalak के द्वारा
May 3, 2011

मलकीत जी ज्ञानवर्धक और सोचने पर विवश करती रचना…. ऐसे ही लिखते रहें … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    malkeet singh jeet के द्वारा
    May 3, 2011

    अबोध जी आप प्रतिक्रियाओ का संबल देते रहे लिखना तो एक जूनून हो गया है

surendrashuklabhramar5 के द्वारा
May 3, 2011

मलकीत भाई सार्थक लेख आप का सुन्दर विषय क्यों न हम पूरे मनोयोग से पालें गाय को उसका भर पेट भोजन -बहुत सही विचार आप के लेकिन क्या ये संभव है नहीं शायद आज शहरों में देखिये लोग पैसा कमाते हैं दान तो कर सकते हैं मगर अपने पास उन्हें पाल नहीं सकते जहाँ खुद उनका उनके परिवार का ठिकाना बा-मुश्किल से हो पता है तो गाय बैल तो दूर की बात है और एक बात इस तरह की परिस्थिति में जो पंडा या पुजारी रहते हैं वे बार बार उस बछिया गाय को पकड़ लाते हैं और बार बार गो दक्षिणा कराते रहते हैं कभी कभी तो कोई गो शाला भी रहती है उसमे रखे रहते हैं सड़कों पर तो कितने लोगों के पशु जो पाले रहते हैं छुट कर घूमते दीखते हैं जो भी हो अपवाद हर जगह है पर विषय आप का जायज है धन्यवाद शुक्ल भ्रमर ५

    malkeet singh jeet के द्वारा
    May 3, 2011

    भ्रमर जी ऐसे लोगो को पुण्य कमाने के दुसरे रस्ते तलाशने चाहिए ,किसी गरीब को खाना खिला कर ,समर्थ होने पर किसी की फीस भर कर आदि आदि , वैसे प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद

Charchit Chittransh के द्वारा
May 3, 2011

जीत जी; जय हिंद ! आपने बहुत ही अच्छा विषय बहुत अच्छी तरह प्रस्तुत किया है ! वास्तव में हरेक के धर्म कार्य करने और उनके तरीकों का भी वर्णन किया गया है !विशेषकर हिन्दू धर्म में तो एक एक बारीकी और गलत तरीके से किये गए धार्मिक कृत्य से लगने वाले पाप का भी वर्णन है !किन्तु हम में से अधिकांश शोर्टकट ढूँढने के आदि हैं !उससे भी घातक परिपाटी अर्ध अन्धानुकरण की है !हर क्षेत्र में !

    malkeet singh jeet के द्वारा
    May 3, 2011

    चर्चित जी ये शार्टकट ही तो सरे फसाद की जड़ हैं नहीं तो अन्ना जी को अनशन की क्या जरुरत थी ,भ्रस्टाचार का बाल रूप रिश्वत, शार्ट कट का ही दिया रोग है जिसके फलने फूलने पर हो हल्ला हो रहा है

khushbu arora के द्वारा
May 3, 2011

Great article explains the importance of charity cow

    malkeet singh jeet के द्वारा
    May 3, 2011

    धन्यवाद खुशबु जी


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