फुर्सत के दिन/fursat ke din

एक प्रयास,"बेटियां बचाने का"में शामिल होइए http://ekprayasbetiyanbachaneka.blogspot.com/

40 Posts

603 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 4540 postid : 143

जला देती है प्रह्लाद को होलिका ?-Holi Contest

  • SocialTwist Tell-a-Friend

होलिका

जला दी होलिका
सब ने मिल कर
मगर
लाख चाह कर भी
न जल सके
द्वेष,घ्रणा, और नफरत के बीज
जो उगाये हमी ने

मिल गए सब रंग एक में
चेहरे पे लगे
धुले
फिर बह गए नालिओं में
एक साथ मिल कर
न मिल सके वो लोग
न मिट सके ,लगे दाग
इंसानियत पे
जो लगाये हमी ने 

यही वजह है जो सदियो से
जला रहे है हम होलिका
पर वो जला देती है
प्रह्लाद को
बार बार
कभी अयोध्या,कभी गोधरा,तो कभी कश्मीर में
जो बनाये है हमी ने
क्या हो गयी है होलिका
इतनी रूद्र 
जल जल कर
कि जला दे
सब संवेदनाये ,भाईचारा, और मेरा देश
या जलाये हैं ये सब हमी ने

 

 MALKEET SINGH JEET

9935423754

| NEXT

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (13 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

75 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

kajalkumar के द्वारा
April 11, 2011

वाह जी बल्ले बल्ले

    MALKEET SINGH JEET के द्वारा
    April 11, 2011

    धन्यवाद सर जी वैसे आपके कार्टूनों का भी जवाब नहीं

sunil shastri के द्वारा
April 4, 2011

कौन कहता है आसमान में छेद नहीं होता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो जैसा होलिका के साथ है ऐसा ही रामायण के रावण के साथ भी नहीं है ज़नाब उस पर भी कुछ पोस्ट करेंगे क्या ? इंतजार रहेगा

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    April 5, 2011

    धन्यवाद ,सुनील जी अभी ऐसा कुछ है नहीं जब भी कुछ बन पड़ेगा जरुर दिखेगा

R HARSHVARDHAN के द्वारा
April 4, 2011

जीत शीर्षक को सार्थक करती रचना पोस्ट की है,व्यस्तता के कारण देर से आपाया क्षमा करें

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    April 5, 2011

    शुक्रिया हर्षवर्धन जी

sumit के द्वारा
April 1, 2011

चर्चित ब्लाग में आने की बधाई जीत जी उम्मीद है होली भी अच्छी बीती होगी

    MALKEET SINGH JEET के द्वारा
    April 1, 2011

    dhanyavd sumit ji

allrounder के द्वारा
March 31, 2011

मलकीत सिंह जी, नमस्कार जज्बातों को कविता की माला मैं बेहतरीन तरीके से पिरोने के लिए हार्दिक बधाई, एवं होली कांटेस्ट के लिए शुभकामनायें !

    Malkeet Singh JeeT के द्वारा
    April 1, 2011

    धन्यवाद ,सचिन जी आप लोगों का सानिध्य ही सब कुछ सिखा गया वर्ना मै कुम्हार का कच्चा घड़ा ही था इसी जा जं ने ही इस लायक बनाया कि एक आध बारिश झेल जाऊ

suman rajendra singh के द्वारा
March 31, 2011

सिंह जी वैसे तो आपकी नीली चाय भी अछि थी पर यह कृति एक अलग ही अंदाज में है बहुत बढ़िया

    Malkeet Singh JeeT के द्वारा
    March 31, 2011

    धन्यवाद सुमन जी

shalender shail के द्वारा
March 31, 2011

इसे कविता नहीं कहुगा ,ये तो एक तीर है भई

    Malkeet Singh JeeT के द्वारा
    March 31, 2011

    धन्यवाद गुरुदेव बस आपका आशीष चाहिए

mayur goyal के द्वारा
March 31, 2011

सच्‍चाई से रूबरू कराना इसी को कहते है बहुत ही बेहतरीन कृति

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    March 31, 2011

    धन्यवाद मयूर जी

Nikhil के द्वारा
March 31, 2011

ऐसी ही रचनाओ की जरुरत भी है जो दिल को छू जाएँ

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    March 31, 2011

    बस एक छोटा सा प्रयास था निखिल जी

Anand Raj Anand के द्वारा
March 31, 2011

जीत भाई एक बार फिर सीधी सरल भाषा में प्रस्तुति के लिए बधाई स्वीकारें होलिका के बहाने निशाना सही जगह लगाया है आहा है आगे भी लय में रहेगे

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    March 31, 2011

    आपने पसंद किया अच्छा लगा

manjari के द्वारा
March 31, 2011

बहुत ही शानदार और दिल को छू जाने कविता के लिए हार्दिक बधाई. समाज को आईना दिखाती हुई रचना है जित जी

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    March 31, 2011

    ये आईने देखना कौन चाहता है मंजरी जी ,नहीं तो ये नौबत ही क्यों आये

Bhartendu yogi के द्वारा
March 31, 2011

आपकी यह रचना हमारे सभ्य समाज के कलंक को उजागर करती है| और यथार्थपरक रचना अत्यंत ही मर्मस्पर्शी है|

    Anand Raj Anand के द्वारा
    March 31, 2011

    समाज सभ्य रहा ही कहाँ योगी जी ये तो 5 स्टार बिगड़े की श्रेणी में है

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    March 31, 2011

    धन्यवाद योगी जी ,आनंद जी , सही कहते है आप समाज सभ्य कहाँ रहा पर समाज है क्या ?????????

suremdra "rawan" के द्वारा
March 31, 2011

सिंह सहाब, समाज की वास्तविक स्थिति से परिचय कराती हुई सुन्दर अभिव्यक्ति है

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    March 31, 2011

    धन्यवाद सुरेमन्द्र “रावण जी इस विषय से अलग एक सवाल पूंछू ! क्रिकेट फ़ाइनल में किस टीम को सपोट कर रहे है अपनी लंका वाली की या इंडिया की टीम की? हा हा हा

    suremdra "rawan" के द्वारा
    March 31, 2011

    जीत भाई रावण नाम to पत्रकारिता में मिल गया वर्ना हूँ to khalis hindustani

    sumit के द्वारा
    April 1, 2011

    वाह!मुझे तो आज ही पता चला की रावणजी अभी जिन्दा है और वो इंडिया मे शरण लिए हुए है

shameem baagi के द्वारा
March 31, 2011

यही वजह है जो सदियो से जला रहे है हम होलिका पर वो जला देती है प्रह्लाद को बार बार कभी अयोध्या,कभी गोधरा,तो कभी कश्मीर में जो बनाये है हमी ने क्या हो गयी है होलिका सही लफ्जों का चयन है हम अपनी बनाई चीजों के लिए अल्लाह ,वाहेगुरु के बनाये बन्दों को क़त्ल करने से भी गुरेज़ नहीं करते

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    March 31, 2011

    शमीम जी जब तक हम धर्म का सही आर्थ नहीं समझें गे ये तो होगा ही फूट डालो राज करो की नीति न गोरे अंग्रेजों ने छोड़ी न काले अंग्रेजो ने ये आज धी धर्म का वाही इस्तेमाल कर रहे है और हम होने दे रहे है

Narendra gosvami के द्वारा
March 31, 2011

जीत जी नमस्कार, आपने समाज की दशा और अपनी बात बहुत सुन्दर तरीके से कही है बहुत बधाई

manoj kumar के द्वारा
March 31, 2011

ढेरो शुभकामनाये

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    March 31, 2011

    बहुत बहुत शुक्रिया मनोज जी

ANIRUDH के द्वारा
March 30, 2011

JEET JI KAFI DER SE KOSHISH KAR RAHA THA PAR PRATIKRIA POST HO HI NAHI RAHI THI BADHIA KAVITA LAYA HAI AAP AAJ KAL PRAHLAD HI JAL RAHA HAI HOLIKA TO JAL HII NAHI PAT

    Malkeet Singh JeeT के द्वारा
    March 31, 2011

    अनिरुद्ध जी नमस्कार प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद ,कभी कभी नेटवर्क के कारन ऐसी दिक्कतें आ जाती है

R N ray के द्वारा
March 30, 2011

देर हो गई पर दुरुस्त हो गई बढ़िया रचना पढने को मिली खास कर END BAHUT BADHIYA HUA

    Malkeet Singh JeeT के द्वारा
    March 31, 2011

    राय जी धन्यवाद जानकर खुसी हुई की आपको रचना पसंद आइ, आगे भी मार्गदर्शन चाहूँगा

KUMKUM BHATIA के द्वारा
March 30, 2011

वाकई में लोग ऐसे ही होली मानते है सिंह जी बस फार्मेल्टीज ही रह गई है

    R N ray के द्वारा
    March 30, 2011

    कुमकुम जी सही कहा आपने अब तो सभी त्यौहार एक रस्म बन कर रह गए है

    Malkeet Singh JeeT के द्वारा
    March 31, 2011

    कुमकुम जी हौसला बढ़ने का शुक्रिया

    Malkeet Singh JeeT के द्वारा
    March 31, 2011

    और जहा तक फार्मेल्टी की बात है अब तो क्या त्यौहार ,क्या रिश्ते नाते सब फार्मेल्टी ही बन कर रह गए है बिना आर्थिक लाभ के हमें और कुछ सूझता ही नहीं

MAYANK के द्वारा
March 30, 2011

जीत जी बहुत अछि कविता के किये तहे दिल से बशी

    Malkeet Singh JeeT के द्वारा
    March 30, 2011

    मयंक जी प्रतिक्रिया मिली धन्यवाद

rajendra jain के द्वारा
March 28, 2011

फिर एक अच्छी रचना लेकर आये हो बंधुवर बधाई और ढेरो शुभकामनाये आपका यह सफ़र यूँ ही चलता रहे

    Malkeet Singh JeeT के द्वारा
    March 29, 2011

    विजिट करने हेतु धन्यवाद

ruchi rathor के द्वारा
March 28, 2011

जीत जी कविता की आखिरी लेने सचमुच दिल को छू लेने वाली है

    Malkeet Singh JeeT के द्वारा
    March 30, 2011

    रूचि जी धन्यवाद

daljeet singh के द्वारा
March 28, 2011

vadhiya likhde o bha g fecbook te link de ke mehrbani kiti nahi te mai kittho padhana c thnx

    malkeet singh jeet के द्वारा
    March 28, 2011

    THANX VEER JI TOHADA COMMENT MILIYA TA JANO MERA FACEBOOK TE LINK DEN DA MAKASD POORA HO GAYA

    Malkeet Singh JeeT के द्वारा
    March 30, 2011

    वीर जी चाहो तां हिंदी वि लिख सकदे जे बस हिंगलिश ते क्लिक कारन दी लोड है बस

Arun Singh के द्वारा
March 28, 2011

भावयुक्त कविता के लिए बधाई…

    malkeet singh jeet के द्वारा
    March 28, 2011

    धन्यवाद

    Kindsey के द्वारा
    October 30, 2011

    I told my grandmother how you hlpeed. She said, “bake them a cake!”

aftab azmat के द्वारा
March 28, 2011

malkeet ji, नमस्ते…मगर लाख चाह कर भी न जल सके द्वेष,घ्रणा, और नफरत के बीज जो उगाये हमी ने… बहुत अच्छे भाव… http://www.aftabazmat.jagranjunction.com

    malkeet singh jeet के द्वारा
    March 28, 2011

    आफ़ताब जी आप की बराबरी तो नहीं कर सकता बस एक छोटी सी कोशिश है आपको अच्छी लगी धन्यवाद

    Bhartendu yogi के द्वारा
    March 30, 2011

    आफ़ताब भाई की बराबरी तो कोई भी नहीं कर सकता मक्लीत जी कमल लिखते है

Harish Bhatt के द्वारा
March 28, 2011

aadarniya malkeet ji saadr pranaam, bahut hi shaandaar rachna ke liye hardik badhayi. क्या हो गयी है होलिका इतनी रूद्र जल जल कर कि जला दे सब संवेदनाये ,भाईचारा, और मेरा देश या जलाये हैं ये सब हमी ने

    malkeet singh jeet के द्वारा
    March 28, 2011

    सर जी आशीर्वाद हेतु धन्यवाद पर बड़े अगर बच्चो को आदरनीय कहे तो बच्चे बड़ो को क्या कहेगे अतः छोटे भाई का दर्जा हमसे न छीने

ashvinikumar के द्वारा
March 28, 2011

सिंह साहब ,,सादर अभिनन्दन ,, समाज को अच्छा एवं विचारणीय संदेश देती कविता,, आभार ,,,,,,,जय भारत

    malkeet singh jeet के द्वारा
    March 28, 2011

    भाई जी प्रतिक्रिया देने हेतु धन्यवाद

surendrashuklabhramar के द्वारा
March 27, 2011

यही वजह है जो सदियो से जला रहे है हम होलिका पर वो जला देती है प्रह्लाद को खूब कहा मलकीत भाई आप ने बहुत शानदार विचार सार्थक समाज को जोड़ने की अभिव्यक्ति काश आप के ये रंग होली में समां बाँधें- सब मिल जुल एक हों बधाई हो सुरेन्द्र शुक्ल भ्रमर५

    Malkeet Singh JeeT के द्वारा
    March 28, 2011

    धन्यवाद बड़े भाई जी दिल से कुछ बुँदे टपकने की देर रहती है फिर वह बुँदे कब धर बन जाये किसे पता

    MAYANK के द्वारा
    March 30, 2011

    भ्रमर जी जीत भी की बढ़िया कविता पर आपकी बढ़िया प्रतिक्रिया है पर सब मिलजुल कर रहते कहाँ है

March 27, 2011

न मिट सके ,लगे दाग इंसानियत पे जो लगाये हमी ने………… मलकीत जी बेहतरीन पंक्तियाँ…..

    Malkeet Singh JeeT के द्वारा
    March 28, 2011

    राजेंद्र जी धन्यवाद बड़े भाइओ की आशीष मिलती रहे तो लिखने की प्रेरणा मिलती रहती है

Ramesh Bajpai के द्वारा
March 27, 2011

न मिल सके वो लोग न मिट सके ,लगे दाग इंसानियत पे जो लगाये हमी ने दिल के झरने से स्फुटित हुयी संवेदनाये सटीक चित्रण करती गयी और पश्नो की श्रृंखला जबाब मांगती है हम से ? बधाई

    Malkeet Singh JeeT के द्वारा
    March 28, 2011

    आदरनीय बाजपेयी जी सच कहा आपने दिल की बाते ही इन पक्तियों की शुरुवात की तो मुझे नहीं पता था की क्या लिखने जा रहा हूँ बस चलचित्र सा जो चलता गया वाही शब्दों का रूप लेता गया

    MAYANK के द्वारा
    March 30, 2011

    sach kaha aapne jeet ji shabd apne aap hi judte hai

Raghvender Raj के द्वारा
March 27, 2011

मिल गए सब रंग एक में चेहरे पे लगे धुले फिर बह गए नालिओं में एक साथ मिल कर न मिल सके वो लोग न मिट सके ,लगे दाग इंसानियत पे जो लगाये हमी ने भाव पूर्ण प्रस्तुति के लिए बधाई उपरोक्त पंक्तियाँ बहुत बढ़िया थी बिलकुल दिल को छू गई

    malkeet singh jeet के द्वारा
    March 27, 2011

    Raghvender Raj उत्साह वर्धन हेतु धन्यवाद आगे भी मार्गदर्शन चाहुगा

gunjan sharma के द्वारा
March 27, 2011

बढ़िया शब्द चित्र खीचा है जीत भाई साहेब

    malkeet singh jeet के द्वारा
    March 27, 2011

    सर्वप्रथम प्रतिक्रिया देने हेतु धन्यवाद

    Er. D.K. Shrivastava Astrologer के द्वारा
    March 28, 2011

    गुड


topic of the week



latest from jagran