फुर्सत के दिन/fursat ke din

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..............सुनामी !!

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“जीत” जहाँ  हर आँख  हो नम
      क्या रंग बिखेरूं  खुशियों के
हरसू हरसू गम का मौसम
       क्या रंग बिखेरूं  खुशियों के
दुःख से बोझिल तन,मन ,आतम
      क्या रंग बिखेरूं  खुशियों के
हर दिल में “सुनामी” का मातम
      क्या रंग बिखेरूं  खुशियों के
अब हाँथ उठे ,ये दुया करे
महके खुशियों से हर मन
            तब  रंग बिखेरूं  खुशियों के
            तब दीप जलाएं खुशियों के
 

मलकीत सिंह “जीत ”
9935423754

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

संदीप कौशिक के द्वारा
April 23, 2011

हरसू हरसू गम का मौसम क्या रंग बिखेरूं खुशियों के आज की सामाजिक दशा को कचोटती इस बेहद खूबसूरत रचना के लिए आपको बहुत-बहुत बधाइयाँ !! :)

Rajkamal Sharma के द्वारा
March 13, 2011

आतम jit ji nmskaar इस शब्द का मतलब समझाए …… आपकी कविता जहाँ एक तरफ उन सभी के दुःख को बयान करती है वहीँ दूसरी तरफ अच्छे वक्त के फिर से आने की आशा भी दिखलाती है …… बेहतरीन कविता के द्वारा उन सुनामी पीडितो को दी गई आपके द्वारा श्रदांजली सराहनीय प्रयास है , इसमें मैं भी आपके साथ हूँ …….

    malkeet singh "jeet" के द्वारा
    March 15, 2011

    Rajkamal Sharma ji प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद

March 13, 2011

मलकीत जी, सशक्त कविता के माध्यम से अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं आपने. आपके प्रयास के लिए साधुवाद.

    malkeet singh jeet के द्वारा
    March 13, 2011

    प्रतिकिर्या रूपी आशीर्वाद देने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद

आर.एन. शाही के द्वारा
March 12, 2011

जीत जी, सचमुच आज अंतर्राष्ट्रीय शोकदिवस जैसा ही आलम है । आपकी अपने ढंग से दी गई श्रद्धांजलि के लिये साधुवाद ।

    malkeet singh jeet के द्वारा
    March 13, 2011

    शाही जी प्रतिकिर्या रूपी आशीर्वाद देने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद


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