फुर्सत के दिन/fursat ke din

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शोहरत

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कर दे सर जो वो कलम उनकी इनायत होगी
बाद मरने के मेरे नाम ये शोहरत हो गी
         कर दें सर जो वो कलम ……………|
घर से निकलें है वो आज नया खंज़र ले कर -३
रोक ले रहें जो किसमें ये हिम्मत हो गी
         बाद मरने के ………………………….|
                कर दें सर जो वो कलम ……………|
उसको  फुर्सत जो मिली किसी रोज़ ज़ख़्म देने से -३
उसको महसूस फिर मेरी जरुरत हो गी
         बाद मरने के ………………………….|
                कर दें सर जो वो कलम ……………|
ख्वाहिशे और नहीं)जिन्दा रहने के लिए (ख्वाहिशे और नहीं -३
“जीत” मर जाऊ अगर उनपे ही तोहमत हो गी
         बाद मरने के ………………………….|
                कर दें सर जो वो कलम ……………|
मलकीत सिंह “जीत ”
9935423754 

 

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

संदीप कौशिक के द्वारा
April 23, 2011

इस अति सुंदर और मर्म-स्पर्शी रचना के लिए आपको बहुत बहुत बधाई !! :)

alkargupta1 के द्वारा
March 10, 2011

मलकीत सिंह जी, अति सुन्दर रचना !

दीपक पाण्डेय के द्वारा
March 9, 2011

बहुत अच्छी ग़ज़ल मलकीत जी.

rkpandey के द्वारा
March 9, 2011

मलकीत जी, आपकी काव्य रचना मुझे अच्छी लगी. बधाई.

div81 के द्वारा
March 9, 2011

बहुत खूब

ratnesh के द्वारा
March 9, 2011

बढ़िया शब्दों का समायोजन किय है जीत भाई ,बधाई


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