फुर्सत के दिन/fursat ke din

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शीर्षक गीत "फुर्सत के दिन"

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उन के पास कभी हों शायद ,इतनी भी फुर्सत के दिन
उनको याद मेरी आये और, दिल की धड़कन हो मधिम
            उन के पास कभी हों शायद……………..
फिर वो ढूंढे शायद  कोई,खोए सपनो का साथी
शायद उनको साथ गुजरे ,फिर से याद आयें सावन
            उन के पास कभी हों शायद………………
कसक उठे फिर उनका भी दिल ,भूली बिसरी यादों से
हाँथ पकड़ लें फिर वो मेरा ,फिर से हो वो मधुर मिलन
             उन के पास कभी हों शायद………………
उन के पास कभी हों शायद ,इतनी भी फुर्सत के दिन
उनको याद मेरी आये और, दिल की धड़कन हो मधिम
                       उन के पास कभी हों शायद………………

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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

anand dev के द्वारा
February 25, 2011

बढ़िया रचना देने के लिए धन्य वाद अच्छे शब्दों का चयन किया है

ramonu bhujo के द्वारा
February 23, 2011

पीरौ काबा ही रामौ कौ आछी

shameem rohtagi के द्वारा
February 23, 2011

क्या खूब, विरह को कितने सलीके से पेश किया है

r c tripathi के द्वारा
February 23, 2011

बढ़िया रचना है बधाई हो

shab के द्वारा
February 23, 2011

बहुत अच्छी रचना के लिए बधाई स्वीकार करें….

dharmesh rana के द्वारा
February 22, 2011

उम्मीद भी कभी कभी कितना सुकून दे जाती है कितने बढ़िया ढंग से चित्रित किया है बधाई बढ़िया पंग्तियो के लिए

somendr के द्वारा
February 22, 2011

क्या सुंदर भाव दिए है भाई वह

atul rahi के द्वारा
February 22, 2011

rachana bahut badhia lagi bhai jee aapki 1 kahani pilibheet ki ak kitab me padhi thee kaya vo j j pr bhi padhne ko mile gee

    jeetrohann के द्वारा
    February 22, 2011

    अतुल जी कोशिश करू गा इसी वीक आपको आपकी मन पसंद रचना से रूबरू करवा दूँ ज ज पर टिप्पणी के लिए धन्यवाद पुस्तक पढ़ने के किये विशेष धन्यवाद मलकीत सिंह जीत

sukhbeer sukhbeer के द्वारा
February 22, 2011

बोहोत वधिया २२ g २ ४ कवितावां मेरे मेल या ऑरकुट ते व् सेंड क्र दो थैंक्स

    jeetrohann के द्वारा
    February 22, 2011

    वीर जी चाहो तां ऑरकुट फेसबुक जिस ते मर्जी सर्च कर के add कर लो आइ डी है jeetrohann@ऑरकुट या फेसबुक जो व् चाहो . काम मलकीत सिंह जीत


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