फुर्सत के दिन/fursat ke din

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ख्वाइश

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तेरे इस प्यार दी खातिर  मै लड़ सकदा हाँ दुनियां ना
तेरी ख्वाइश है चन्न ,तारे  मै किधरों तोड़ के ल्यावा !
            मैनू चाहत द वल न सी ,तेरी वि जिद अनोखी सी
       मै इक इन्सान हाँ केंवें हवावां  मोड़ के लयावा
 तेरी ख्वाइश है चन्न ,तारे  मै किधरों तोड़ के ल्यावा !
  तेरे इस प्यार …………………………………. दुनियां ना
        मै बचपन तो जवानी तक तैनू ही प्यार कीता सी
        के इक इक ख्वाब वि आपना तेरे तो वार दित्ता सी
गया हाँ हार तेरे तो के की किस्मत नु अजमावा
तेरी ख्वाइश है चन्न ,तारे  मै किधरों तोड़ के ल्यावा !
तेरे इस प्यार …………………………………. दुनियां ना
          शाजिशा कर दी सी दुनिया, मगर अफसोस ऐना है
          के आज दुनिया च तूँ वि है,मै केवे देख न सकदा
नजर एह मुड नहीं सकदी  मै दिल नु किंज समझावां
तेरी ख्वाइश है चन्न ,तारे  मै किधरों तोड़ के ल्यावा !
 तेरे इस प्यार …………………………………. दुनियां ना

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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

harmam के द्वारा
February 18, 2011

वधिया चल रहे जे २२ g

rounakjahan के द्वारा
February 18, 2011

वास्तव में देश की राष्ट्रपति तक एक महिला है फिर भी हमारे समाज में औरत को हेय द्रष्टि से देखा जाता है ,आपकी कविता में इसे बहुत बढ़िया दिखाया गया है ,अल्लाह ताला आपको तंदरुस्त रक्खे

r d ray के द्वारा
February 17, 2011

बहुत ही उम्दा रचनाएं पोस्ट की गयी

govind के द्वारा
February 17, 2011

बहुत ही सुन्दरता से शब्दों को एक माला मैं पिरोया है आपने उसके लिए बधाई !

apsra के द्वारा
February 17, 2011

v good

razia के द्वारा
February 16, 2011

बहोत अच्छी लगी ये रचना वैसे भी प्यार-जुदाई की बातें पंजाबी लहेजे में बड़ी मीठी लगदी हैं |

आर.एन. शाही के द्वारा
February 16, 2011

सराहनीय प्रयास । एक व्याकुल और नाकाम आशिक़ की गुहार । दो चार दिन पहले डालना था भाजी । बधाई ।

jaspalraj के द्वारा
February 16, 2011

कोई ते आया पंजाबी लिखाण वाला बल्ले भाजी

arsh के द्वारा
February 16, 2011

वीर जी वधिया लिख्या जे

shab के द्वारा
February 16, 2011

tere is pyaar di khatir…wah kya baat hai…badhai.. http://www.shabazmat.jagranjunction.com

    jeetrohann के द्वारा
    February 16, 2011

    धन्यवाद मैंम जी स्नेह व् आशीर्वाद हमेशा चाहुगा आपका अनुज मलकीत सिंह “जीत”

February 16, 2011

जीत प्राह जी. तू सी ठीक कहन्दो हो अपने प्यार के वास्ते आदमी दुनिया से लड सकता हॆ.अच्छी कविता.पंजाबी अच्छी तरह नहीं आती-इसलिए कुछ गलती हुई हो तो माफ करना.

    jeetrohann के द्वारा
    February 16, 2011

    धन्यवाद सर जी स्नेह व् आशीर्वाद हमेशा चाहुगा आपका अनुज मलकीत सिंह “जीत”


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